Wednesday, March 6, 2013

वो प्यार था या कुछ और था

  "रोहित… अक्षय ....उज्ज्वल ....नव्या ....." ...........क्लास में अटेंडेंस लेते-लेते एकदम से नीमा ठिठक गयी ......एक नये चेहरे को देखकर ! क्लास में नये बच्चों का दाखिला होना और नये चेहरे दिखना  अप्रत्याशित न था, पर उस बच्ची नव्या के चेहरे पर ज़रूर कुछ अप्रत्याशित था ........ऐसा नहीं, जिसकी कल्पना  कभी नीमा ने न की हो, बल्कि उससे ठीक उलट था ! ऐसा , जिसकी सुखद कल्पना न जाने कितनी बार उसने की थी  ! कभी अकेले में, तो कभी समर के साथ !

            उसने जैसे-तैसे खुद को काबू में रखकर अटेंडेंस पूरी की और नव्या को अपने पास बुलाकर उसके पापा का नाम पूछा ! "मिस्टर समर सक्सेना !"
नीमा के दिल की धड़कनें और तेज़ हो गयीं ! उसका शक़ सही निकला था ! वही गोल चेहरा, वही बड़ी-बड़ी आँखें, और उन पर घनी पलकें , वही गहरे काले घुंघराले बाल ............जैसे समर टाइम मशीन में तीस साल पीछे चला गया हो !! उसकी ऐसी ही प्यारी सी निशानी के सपने देखे थे समर और नीमा ने , जब अपने भविष्य के सतरंगी सपने बुना  करते थे, कभी न पूरे होने वाले !! वही सपना आज  साकार होकर उसकी आँखों के सामने खड़ा था , पर उसका और समर का नहीं, बल्कि समर और पूजा का , एक परायी और अनजान औरत का, जिसे नीमा ख्यालों में भी एक पल के लिए बर्दाश्त नहीं कर सकती थी , और तड़प -तड़प उठती थी ऐसे सच के ख्याल से भी !
    
         स्कूल की छुट्टी के बाद घर आकर भी वह कहानी चलती रही, जो उसके मन-मस्तिष्क में नव्या से मिलने के बाद शुरू हो गयी थी ! ज़िन्दगी के वे पल , जो वह सात साल पहले क़ब्र में दफ़ना चुकी थी , खूब सारी मिट्टी  डालकर , ताकि अब कोई उस क़ब्र  में से खोदकर उन पलों के कंकाल न निकाल पाए  ! पर आज………।  आज तो वो सब दफ़न किये हुए पल अपनी मौत को झुठलाते हुए पूरे के पूरे जीवित ही निकल कर शिरक़त करने लगे थे उसके इर्दगिर्द ! कभी कोई पल उसे देखकर मुस्कुराता हुआ निकल जाता, तो कभी दूजा पल मुँह चिढ़ाता  हुआ  ;  कोई बेबस आँखों से उसे देख रहा था , तो कोई निगाहों में सवाल लिए उसकी आँखों से जवाब मांग रहा था ! वह चाहकर भी उनके घेरे से बाहर  नहीं निकल पा  रही थी , या शायद निकलना नहीं चाहती थी ! एक पुरानी एल्बम की तरह थे वे, जो दर्द और ख़ुशी एक साथ दे रहे थे ! आख़िरकार नीमा ने उन्हें तसल्ली से समय देने का निर्णय लिया , और बिलकुल पहले पल से मुख़ातिब हुई, जब उसकी और समर  की भाग्य रेखाएं जुड़ने की तैयारी में थीं ! वह सात साल पीछे चली गयी ..............................

 

4 comments:

  1. दिल को छु जाने वाला अनुभव .... सुन्दर रचना ...

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